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फोन के मायाजाल, होगे सब्बो झन के जी के जंजाल


किस्सा मोर मन म आवत हे जे हा आज के अईसनहा दाई-ददा मन के आंखी खोले बर बने हो सकत हावय

आज के समय म हमन अपन कीमती बखत ल फोन म घण्टी लगावत ह अउ अपन घर के लईकन मन करा कम बखत रहत हावन अउ कईथन के हमर नोनी-बाबू मन हमर कहना नई मानय, ठीक से खाय नई इसकुल के होम बरक ल नई करय, इसकुल ले बद्दी आवत हे। येखर बर एक किस्सा मोर मन म आवत हे जे हा आज के अईसनहा दाई-ददा मन के आंखी खोले बर बने हो सकत हावय। जेमन बखत रहत अपन नोनी-बाबू ल जादा समय दे के उनला भटके ले बचा सकत हावय। एक दिन के बात हावय ममा दाई ल राजू ह फोन करिस के मोला, तोर करा एक ठन बद्दी देहे बर हावय के पूरा दिन मोर दाई ह अपन इसमारट फोन म फेसबुक, व्हाट्सएप, अउ ट्वीटर, इंस्टरागराम म लगे रईथे। ददा घलो ह इसकूल ले पढ़ा के आये के बाद घरो म अपन इसमारट फोन म लग जाथे। राधिका दीदी घलो ह अपन गिया करा घण्टो गपियात रईथे। ये घर म मोर बर कोनो करा समय नई हे। ममा दाई ये घर म मोर इसकूल के होम बरक करावये बर कोनो नई हे, कोनो साथ नई देवय। मै ह अकेल्ला हो जाथो। ट्यूसन घलो जाथो त उहां कछु सवाल पूछ देबे त मेडम कईथे येला गुगल म खोजबे त पता चल जाही। मै ह का करव ममा दाई? राजू के सब बात ल सुनके ओखर ममा दाई ह कईथे ठीक हे बेटा तय चिंता झन कर मय ह उंहा आ के फोन के मायाजाल ल ठीक करहूं। अउ ये बात ल तय ह अभी कहूं ल मत बताबे। राजू के ममा दाई राजू इंहा अचानक पहुंच जाथे त ओखर बेटी लछमी अपन दाई ल देख के अचरज म पड़ जाथे के दाई ह अचानक कईसे आ गे। लछमी कईथे कईसे दाई तय आवत हो कईते त राजू के पापा ह तोला लेहे टेसन आ जातिस त तोला परेसानी नई होतिस त ओखर दाई ह कईथे म ह एकता सियान नई हो गे हो के थोरकन बर राजू के ददा ल बुलाते। ममा दाई के आये म सब खुस हो जाथे। पर दू-चार दिन के गये ले राजू के पापा गिरधारी, राजू के दाई लछमी अउ राजू के बहिनी राधिका सब अपन बुता-काम म ब्यस्त हो जाथे। केवल राजू ह अपन ममा दाई करा गोठियात-बतरावत रईथे बाकी कोकरो करा ममा दाई बर समय नई रहय के थोरकन ओकर करा गोठिया लेवय। राजू ह रोज रात के ममा दाई करा सोवय अउ रोज एक ठन किस्सा सुनय अउ अपन इसकुल के बारे म घलो बतावय। राजू के अलावा सबे झन याने ओखर ददा, दाई अउ दीदी ह आज के फोन के मायाजाल याने जेला सोसल मीडिया कईथे म ब्यस्त रहय। ममा दाई थोरकन दिन देखिस फेर एक रतिहा खाना खाय के बाद अपन नोनी लछमी, दमाद गिरधारी अउ नतनीन राधिका ल एक जगह बईठा के कईथे मैं तुमन ल देखत हावय त तुमन हर बखत ये फोन म लगे रईथा। गिरधारी घलो ह अपन इसकुल ले आके अपन फोन म घण्टों कोन जानी काय-काय करत रईथे। अउ राधिका घलो दिनमान त दिनमान रतिहा तक फोन म कोन जानी का करत रईथे। तुम मन ल देखत हो त तुमन तो अपने म ब्यस्त रईथा चला मय तो सियान हो गे हो तुमन आज के लईका ह ता मोर बर समय नई हे तभो चल जाही पर राजू ह अभी नानकन लईका हे तुम मन ल सोचना चाही के ओखर मन म का असर पड़त होही। न तुमन ओखर इसकूल के पाठ ल याद करावा अउ ट्सूसन घलो म मेडम ह बने नई पढ़ाये त ओखर पढ़ई-लिखई के का होही। नानकन लईकमन मन ल दाई-ददा के जादा जरूरत होथे त ये बखत म तुमन अपने म ब्यस्त हावय। त लईका ल दाई-ददा अउ दीदी के पियार इसनेह के संगे-संग अच्छा-बुरा अउ घर के संसकार कहां ले मिलही? ये सब तुमन के मोबाईल ले मिलही त उहू ल एक ठन मोबाईल दे देवा त उहू ह तुमन के जईसे ब्यस्त हो जाही।


प्रदीप कुमार राठौर जांजगीर
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