भारतीय रेलवे की घोषणा के बाद से पटरी पर दौड़ रहीं ट्रेनें अपने-अपने गंतव्य पर पहुंचकर समाप्त होती जा रहीं हैं। बिलासपुर स्टेशन से चार ट्रेनें आकर गुजर गईं, एक आकर यहीं थम गई। मंगलवार से कोई भी पैसेंजर ट्रेन नहीं आएगी। पूरे दिन प्लेटफार्म पर सन्नाटा पसरा रहा। आरपीएफ ने सभी रास्तों और एफओबी को बंद करा दिया है।
जनता कर्फ्यू के दूसरे दिन बिलासपुर रेलवे स्टेशन परिसर सूनसान रहा। सिर्फ रिजर्वेशन काउंटर पर ही भीड़ लगी रही। सिर्फ दो काउंटर खुले थे। एक पूछताछ और दूसरा रिजर्वेशन कैंसिलेशन वाला। आरक्षण कैंसिल कराने वालों की लाइन सुबह से ही लगने लगी थी। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद भी स्थानीय जोनल मुख्यालय ने रिजर्वेशन काउंटर बंद नहीं किया है। इस वजह से वहां दिनभर भीड़ बढ़ती गई। वहां पर लोगों काे संभालना मुश्किल हो गया था। जनता भी नहीं समझ रही थी। काउंटर पर बैठे कर्मचारी तो मास्क लगाए हुए थे लेकिन बाकी सारे लोग ऐसे ही खुले थे।
यात्री सवारी को तरस गए
अमृतसर से बिलासपुर आने वाली छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस दोपहर 12.30 बजे बिलासपुर पहुंची। उससे गिने चुने मुश्किल से 30 यात्री ही उतरे। सभी बाहर निकले लेकिन किसी को घर जाने के लिए साधन नहीं मिला। यात्री ऑटो तलाशते रहे लेकिन नहीं मिला। दो ऑटो वालों ने सवारी बिठाया और चले गए बाकी कोई नहीं था। लोग घंटों वहीं सवारी का इंतजार करते रहे।
ये ट्रेनें बिलासपुर से गुजरीं
बिलासपुर रेलवे स्टेशन से रात एक बजे मुंबई-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस, रात 1.30 बजे अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस, तड़के 5 बजे अमृतसर-विशाखापट्नम हीराकुंड एक्सप्रेस, सुबह 7.10 बजे पुणे-गोवाहाटी स्पेशल ट्रेन आकर गुजरी। दोपहर 12.15 बजे छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस यहां आकर रुक गई।
स्टेशन में एक ही गेट खुला: रेलवे स्टेशन का गेट नंबर तीन ही खुला रखा गया है बाकी सभी गेट सोमवार को बंद कर दिए गए। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी डी बस्तिया ने सभी गेट को बंद कराया एवं एफओबी में जाने वाले सभी रास्ते बंद कराए। सभी प्लेटफार्म पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है। चूंकि यार्ड में कहीं जगह नहीं है इसलिए विभिन्न ट्रेनों की रैक प्लेटफार्म पर ही खड़े किए गए हैं।
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