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पौधे लगाने से पहले बताना होगा, पिछले साल के कितने बचे


हरियाली के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन आधे से अधिक पौधे नहीं बच पा रहे हैं। इसे देखते हुए जिला पंचायत की वन स्थाई समिति इस बार सख्त हो गई है। वन विभाग के अधिकारियों को पौधे लगाने के लिए टारगेट तय करने के साथ यह बताना होगा कि पिछले साल कितने पौधे लगाए थे और इनमें कितने पौधे बचे हैं।

दरअसल हर साल पौधारोपण पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन पौधे नहीं बच पाते हैं। इससे यह कदम उठाए जा रहा है। जिले में हर साल दस से बारह लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। बारिश से पहले पौधे लगाए जाते हैं और अभी से इसकी तैयारी शुरू हो गई हैं। इसे देखते हुए कई एजेंसियां पौधे की सप्लाई के लिए सक्रिय हो गई हैं। पिछले दो सालों से जिले की आबादी से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं, लेकिन एक आधे से अधिक पौधे बच पा रहे हैं। शहर से लगी खैरबार पंचायत में वन विभाग के अलावा विभिन्न संगठनों के माध्यम से पौधे लगाए गए थे लेकिन गिने-चुने पौधे भी नहीं बचे हैं। यह स्थिति पूरे जिले में हैं। जिला पंचायत में वन स्थाई समिति की अध्यक्ष अनिमा केरकेट्‌टा ने कहा कि हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन देखने में आ रहा है कि पौधे की सुरक्षा के लिए उपाय नहीं किए जाते हैं। इससे पौधे मवेशी नष्ट कर देते हैं। अगले वर्ष फिर वहां अभियान चलाकर पौधे लगाए जाते हैं। यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है। अब ऐसा नहीं चलेगा। पौधे लगाने के साथ संबंधित एजेंसियों को उसकी सुरक्षा के इंतजाम भी करने होंगे। वहीं जंगलों जो कट रहे हैं। उसे बचाने के लिए भी प्रयास करना होगा। वन विभाग के अलावा मनरेगा के तहत पिछले सालों में पौधे लगाए जा रहे हैं। मैनपाट में पिछले साल सौ एकड़ से अधिक एरिया में पौधे लगाए गए थे, लेकिन कहीं पौधे नहीं बच पाए सरकारी कार्यालयों में भी पौधे गायब हैं।

एकजुट हुए तो यहां फिर लौटी हरियाली

मैनपाट के बरिमा में ढाई सौ एकड़ में फिर से हरियाली लौट आई है। वनों की बेतहाशा कटाई से पूरा इलाका उजड़ चुका था। वन विभाग ने यहां के लोगों को एकजुट किया और बताया कि वनों की कटाई से किस तरह से उनका नुकसान हो रहा है। हरियाली मैनपाट की पहचान रही है और यही उजड़ रही। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि अब पेड़ काटेंगे न काटने देंगे। वहीं पौधारोपण करने और इसे बचाने का संकल्प लिया। इसका सकारात्मक परिणाम दिखाई दिया है। पूरे इलाके में फिर से पेड़ तैयार हो रहे हैं।


पंचायतों में सरपंच, पंचों के साथ ग्रामीण करेंगे माॅनीटरिंग

पौधे लगाने से पहले सभी पंचायतों में सरपंच, पंच के अलावा ग्रामीण तय करेंगे कि कहां पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि पंचायत के लिए जो टारगेट तय हुआ है उतने पौधे लगाए जा रहे हैं। वहीं सुरक्षा को लेकर भी इंतजाम कराए जाएंगे।



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