बिलासपुर. कोरोनावायसर के संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट की ओर से यह जवाब एक लाॅ छात्र के पत्र पर मांगा गया है। पत्र में छात्र ने काेरोना के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदम का नाकाफी बताया है। छात्र ने इस मामले में चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन के नाम पत्र लिखा था। अब मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।
लॉ छात्र की ओर से पत्र में लिखा गया है कि कोरोनावायरस से भय का माहौल है। सेनेटाइजर और मास्क बाजार में नहीं मिल रहे हैं। इससे लोगों में और ज्यादा घबराहट और भय का माहौल है। केंद्र और राज्य सरकार वायरस के फैलाव को नियंत्रण में करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैं। छात्र ने कार्रवाई करने और दिशा निर्देश देने की मांग किया। कोर्ट ने इस पत्र को ही जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की है।
मामले में न्याय मित्र अधिवक्ता प्रफुल्ल भारत को नियुक्त किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार के तरफ से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल बी. गोपा कुमार, राज्य सरकार के ओर से सुदीप अग्रवाल पक्ष रखने उपस्थित हुए। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया है। इस पर केंद्र सरकार के ओर से प्रधानमंत्री के वक्तव्य, पीएमअो और स्वास्थ्य मंत्रालय से जारी गाइड लाइन की जानकारी दी गई। साथ ही राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में बताया गया।
हाईकोर्ट प्रवेश पास जारी करने पर रोक
हाईकोर्ट में सभी बाहरी लोगों के प्रवेश और पास बनाने पर रोक लगा दी गई है। थर्मल स्केनिंग के माध्यम से प्रवेश करने वालों की जांच की जा रही है। बिल्डिंग में प्रवेश से पहले हाईकोर्ट प्रोटोकॉल से अनुमति लेनी होगी। सभी के शरीर का तापमान जांचने के साथ सेनेटाइजर से हाथ साफ कराया जा रहा है। कोर्ट टाइम में डॉ. एसए सिद्दीकी एमडी मेडिसिन की टीम तैनात की गई है। वहीं 2 हजार लोगों के हिसाब से संक्रमण से बचाव के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है।
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